जनमाध्यम

जनमाध्यम लोगों को सूचना प्रदान करने के साथ ही उनकी भावनाओं और विचारों को आवाज देता है। वैसे तानाशाही शासन में ये या तो कैदी होता है या मिथ्या प्रशंसक होता है।

प्रत्येक लेखक को शब्दों और व्यवहार में सद्व्यवहार होना चाहिए और उसे भाषा और लेखन में उन्नत होना चाहिए। अन्यथा, भ्रामक अच्छाई के चक्कर में बड़ी क्षति हो सकती है।

जो पत्रकार और लेखक राष्ट्रीय भावना और विचार के अनुसार नहीं लिखते वे बेबीलोनियन दासता का प्रातिनिधित्व करते हैं।

जनमाध्यम को किसी के व्यक्तिगत भावना के लिए काम नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र की सेवा करना और पूरे राष्ट्र को सूचना प्रदान करना है।

बहुत सी मस्तिष्क की अस्थियां अब कब्रों में क्षयग्रस्त हो रही हैं। जिनमें ऐसी पुस्तकें है जो तानाशाही और सेंसरशिप के कारण लिखी नहीं जा सकती।

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प्रकाशनाधिकार © 2020 फ़तेहउल्लाह गुलेन. सर्वाधिकार सुरक्षित
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