विवाह और गृहस्ती

विवाह का उद्देश्य सुख और आनंद नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य परिवार की स्थापना होता है। ये राष्ट्र के स्थायीत्व और निरंतरता के लिए आवश्यक है। विवाह व्यक्ति को अकेलेपन और बिखराव की भावना और विचारों से बचाता है और (शारीरिक) सुख को नियंत्रित करता है। ये भी ईश्वर द्वारा प्रदान किए गए हमारे मूलभूत प्रकृति से से जुड़े अन्य विषयों की तरह ही है। आनंद विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए पेशगी की रकम की तरह है।

मनुष्य को विवाह अच्छे वस्त्र, धन और शारीरिक सौन्दर्य के कारण नहीं बल्कि आध्यात्मिक सुंदरता, सम्मान नैतिकता, अच्छे गुण और चरित्र के कारण करना चाहिए।

यदि कोई वैवाहिक जोड़ा तलाक लेना चाहता है तो अगर उन्होंने विवाह सही कारण से नहीं किया है तो उस जोड़े को बचाने में कोई भी युक्ति काम नहीं आएगी। महत्वपूर्ण ये नहीं है कि घर की आग से कम से कम नुकसान के साथ बचा जाए, बल्कि उसको लगने से बचाना महत्वपूर्ण हैं।

कुछ तर्क और न्यायसंगत विवाह की शरण में आरंभ किए गए। वे आजीवन एक विद्यालय की तरह पवित्र है, जिसके छात्र राष्ट्र की स्थायित्व और निरंतरता सुनिश्चित करते है।

विवाह के नाम पर बना प्रत्येक संगठन जो बिना सावधानीपूर्वक विचार किए बना है उसने सदा अपने पीछे रोती बिलख्ती पत्नियां, अनाथों और ऐसे लोगों को छोड़ा है जो परिवार के हृदय को आहत करते हैं।

किसी राष्ट्र की अच्छी नीव एक परिवार होता है जिसमें भौतिक और आध्यात्मिक सुख का संचार होता है और ऐसा परिवार एक पवित्र विद्यालय की तरह है जो गुणवान मनुष्य का निर्माण करता है। यदि एक राष्ट्र अपने घरों को प्रबुध और समृद्ध विद्यालयों की तरह और विद्यालयों को घरों की तरह उत्साहयुक्त बना दे तो समझो उसने सबसे बड़ा सुधार कर लिया और अपनी भावी पीढ़ी के लिए संतोष और प्रसन्ता सुनिश्चित कर ली।

राष्ट्र घरों और उसमें रहने वाले व्यक्तियों पर आधारित होते हैं। अगर घर अच्छे है तो राष्ट्र अच्छा है और यदि घर बुरे हैं तो राष्ट्र बुरा है। यदि लोग सर्वोत्तम राष्ट्र चाहते हैं तो वे सर्व प्रथम घरों के सुधार की दिशा में कार्य करेंगे।

घर शब्द का प्रयोग उसमें रहने वाले लोगों के अनुसार होता है। यदि घर के लोग माननीय मूल्यों को एक दूसरे में बाँधते हैं तो समझा जाता है कि वे खुश हैं। हम कह सकते हैं कि लोग अपने परिवार के सदस्यों के साथ मानीवयता और आत्मीयता के साथ है; घर उसमें रहने वाले सदस्यों से बनता है।

घर एक छोटा राष्ट्र है, और एक राष्ट्र एक बड़े परिवार की तरह है यदि किसी ने एक घर को सफलतापूर्वक व्यवस्थित कर लिया और उसके सदस्यों को मानवता के स्तर तक विकसित कर दिया तो वह एक बड़ी संस्था को बहुत थोड़े प्रयास से व्यवस्थित कर सकता है।

एक अव्यवस्थित घर का अर्थ है उसमें रहने वाले लोग मलिन और दुःखी हैं। घरों, दुकानों और गलियों की गंदगी, अव्यवस्था, और अनियमता वहां के स्थानीय अधिकारियों की संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है।

यदि कोई सही है तो उसके पराजय के बावजूद उसे सराहा और पसंद किया जाता है जबकि अगर कोई बेइमान है तो उसकी विजय के बावजूद वो घृणा का पात्र होता है और नापसंद किया जाता है।

जो सही है वो चारित्रिक रूप से भी सौंदर्यवान है और दुखी है। यदि कोई सदाचारी व्यक्ति कीचड़ में भी गिरता है तो भी वह शुद्ध और सत्य ही रहता है। और यदि किसी बेइमान को कस्तूरी से भी धो दिया जाय तो वह अशुद्ध और अरूचिपूर्ण ही रहेगा।

वे लोग जो कमजोर को दबाते है वे विजयी दिखते हुए भी पराजित होते हैं और जो सही हैं वे पराजित दिखते हुए भी विजयी ही होते हैं।

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