व्यक्तिगत पवित्रता

जो लोग विश्व को सुधारना चाहते हैं उन्हें सर्वप्रथम स्वयं को सुधारना चाहिए। यदि वे लोगों का नेतृत्व एक अच्छे समाज के लिए करना चाहते है तो उन्हें अपने आंतरिक संसार से द्वेष, शत्रुता की भावना, ईष्र्या को मिटाकर उसे शुद्ध करना चाहिए और अपने बाह्य संसार को गुणों से सुशोभित करना चाहिए। ऐसे लोग जो स्वयं को नियंत्रित और अनुशासित नहीं रख सकते और जिन्होंने अपनी भावनओं को शुद्धिकरण नहीं किया है, उनके शब्द पहली नजर में आकर्षक और अंतर्दृष्टिपूर्ण लग सकते हैं। परंतु यदि वे किसी तरह दूसरों को प्रेरित करने में सफल हो भी जाएं तो जो विचार उन्होंने जागृत किए हैं वे शीघ्र ही मुर्झा जाएंगे।

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